Friday, March 5, 2010

जिंदगी फिर से गुनगुनाये तो अच्छा होता

फांस ये दिल से निकल जाए तो अच्छा होता

जिंदगी फिर से गुनगुनाये तो अच्छा होता


 

 

अब तो तनहाइयों की धूप से जलता है बदन

प्यार की छांव जो मिल जाए तो अच्छा होता


 

 

तमाम शब गुजर गई ग़मों की दरिया में  

तीर कश्ती को जो मिल जाए तो अच्छा होता 


 

 

कोई तो हो भी मेरी नीद की साजिश में शरीक

मेरे खवाबो की ताबीर बदल जाए तो अच्छा होता

 

                                                               (21/2/2010-अनु)

Posted via email from धड़कन

16 comments:

  1. ब्लॉगजगत में आपका स्वागत है!आपके विचार अच्छे लगे!मेरी शुभकामनायें..

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  2. वाह वाह - बहुत खूब
    "कोई तो हो भी मेरी नीद की साजिश में शरीक
    मेरे खवाबो की ताबीर बदल जाए तो अच्छा होता"

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  3. बहुत अच्छा लिखा है आपने। बधाई।

    एक मुफ्त की सलाह (मानना या न मानना आपकी मर्जी) -

    जिन्दगी फिर से गुनगुनाये तो अचछा होता

    की जगह एक बार

    जिन्दगी फिर से गुल खिलाये तो अचछा होता

    करके देखें और विचार करें।

    उम्मीद है अन्यथा नहीं लेंगे।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  4. अब तो तनहाइयों की धूप से जलता है बदन
    प्यार की छांव जो मिल जाए तो अच्छा होता

    panktiyan to bahut sundar hei

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  5. तमाम शब गुजर गई ग़मों की दरिया में

    तीर कश्ती को जो मिल जाए तो अच्छा होता
    Bahut achha likhte hain aap!

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  6. फांस ये दिल से निकल जाए तो अच्छा होता

    जिंदगी फिर से गुनगुनाये तो अच्छा होता
    Sundar chitr aur utneehee sundar rachana!

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  7. अनु जी...!
    आपकी इन खूबसूरत कवितायों के साथ आपका ब्लॉग जगत में स्वागत है....कवितायों के साथ तस्वीरों का चुनाव भी अच्छा है...लगे रहिये....!

    प्यार कुछ और रुलाये तो अच्छा होगा,
    दर्द कुछ और तडपाये तो अच्छा होगा..!

    क्यूंकि....

    मोहब्बत करने वाले गम से घबराया नहीं करते....!

    .....कवि मन जितना तडपेगा...उसकी कविता का सकूं और मिठास उतने ही बाद जायेंगे..!

    हाँ एक बात और...कृपया वर्ड वैरिफिकेशन को हटा दीजिये...इसे हटाना जितना आसान है...भरना बहुत मुश्किल....!

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  8. सुंदर लाइनें ,अच्छी रचना ।
    हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

    कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
    वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
    डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
    इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
    और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये

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  9. कोई तो हो भी मेरी नीद की साजिश में शरीक

    मेरे खवाबो की ताबीर बदल जाए तो अच्छा होता

    खूबसूरत शब्दों में कोमल भावनाओं की अभिव्यक्ति। उम्मीद है आगे भी लिखती रहेंगी। शुभकामनायें।

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  10. रात नींद में अब सपने नहीं आते
    सपने में वो आ जाये तो अच्छा होता

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  11. Excellent literary expression.Go ahead.

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  12. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

    कलम के पुजारी अगर सो गये तो

    ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " http://janokti.feedcluster.com/ से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

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  13. बहुत अच्छा लिखा है आपने। बधाई।

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  14. इस नए चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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