Saturday, March 2, 2013

ये कैसा मौसम है जो टलता ही नही


रंजो गम का सूरज ढलता ही नही
ये दर्द का मंजर बदलता ही नही

यहाँ हर सू है दर्दो गम के अँधेरे
कोई रोशन चराग जलता ही नही 

नए तूफान का आगाज़ है शायद
ये कैसा मौसम है जो टलता ही नही 





5 comments:

  1. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है ......
    सादर , आपकी बहतरीन प्रस्तुती

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    पृथिवी (कौन सुनेगा मेरा दर्द ) ?

    ये कैसी मोहब्बत है

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  2. यहाँ हर सू है दर्दो गम के अँधेरे
    कोई रोशन चराग जलता ही नही

    ...बहुत सुन्दर..

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  3. आया है तो जायेगा यह तूफान..

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  4. वाह...
    सुन्दर ग़ज़ल....

    अनु

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