Saturday, April 27, 2013

आया






कभी कभी ऐसा भी होता है कि अपना दुःख हर एक के दुःख से ज्यादा महसूस होता है कि बस ख़ामोशी से अपने अंदर उतरते हुए अँधेरे को महसूस करने का मन करता है .......

हमें जिंदगी जीने का सलीका ना आया
मगर जिंदगी ने हमे हर बार आजमाया

भूल चुके जब हम सब माज़ी के किस्से
दुश्मने जां फिर मेरा दिल दुखाने आया

था साथ उसके इक नया हमसफर
होकर पराया हमसे हमको जलाने आया

11 comments:

  1. बहुत ही बढ़िया


    सादर

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  2. वाह ... बेहतरीन

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  3. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (28-04-2013) के चर्चा मंच 1228 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  4. आज की ब्लॉग बुलेटिन १०१ नॉट आउट - जोहरा सहगल - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. बड़ा बेमुरव्वत है.......

    सुन्दर रचना.

    अनु

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  6. वाह!!!! लाजवाब

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  7. हमें जिंदगी जीने का सलीका ना आया
    मगर जिंदगी ने हमे हर बार आजमाया------
    वाकई जिन्दगी हरदम आजमाती ही है
    सहज पर गहन अनुभूति
    उत्कृष्ट प्रस्तुति

    आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों

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  8. जीवन मैं आते हैं ऐसे लम्हे ओर उन्ही में यादें खुद-ब खुद आ जाती हैं ...
    अर्थ पूर्ण ...

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