Showing posts with label भारत. Show all posts
Showing posts with label भारत. Show all posts

Monday, May 26, 2014

जिंदगी के मायने

 

312502_252968338093474_100001409299841_763506_1408804130_n

तुमसे मेरी जिंदगी के   मायने   बदल गए

कभी राते गई बदल कभी दिन बदल गए

दिल से तो हर मामला साफ कर के चले

आये जब  वो सामने  तो हम   मचल गए

इक   रात के   हमसफर   नजाने   क्या हुए

शब भर थे साथ सुबह किधर निकल गए

रो पडती मेरे अंदर की उदासी भी शायद

इससे   पहले   अश्क बहे   हम   सभल गए

ये फजा अदावत की किसे   रास है आई

तुम जो मुस्कुराये तो कई दिए जल गए

Sunday, May 11, 2014

चाक जिगर

 

Untitledheartcracked

 

यूँ चाक जिगर हम जब होंगे

ये दर्द   मुकम्मल    तब होंगे

दिल रोएगा आहे भर भर के

खामोश   मगर ये    लब   होंगे

जब बिछड़े   तो मैने   ये जाना

तुम साथ    मेरे न    अब   होगे

चहरे से झलकता है हाले  दिल

ये फासले जाने कम   कब  होगे

जब होगा दीदार उस महबूब का

कई तुफां मेरे दिल मे   तब होगे

Sunday, April 6, 2014

होने लगा

 

images (1)

सहने गुलशन पे खिजाओं का असर होने लगा

अब तेरा    गम भी    मेरा हमसफर    होने लगा

 

बेसहारों को    सहारा दिया   जिसने   कल तक

क्या सितम आज खुद वो दरबदर होने लगा

 

हौले हौले    उनके रगों मे    सनसनाहट आई

नफ़रतों के जहर का ऐसा असर होने लगा

 

थे   दरों दीवार    उसके खंडहर   की तरह

धीरे धीरे बे लबादा हर शजर होने लगा

 

मेरे उजड़ने   की जब   कहानी सुनी   उसने

आंसुओं से चेहरा उसका तरबतर होने लगा

अनु -29/3/2014

Sunday, March 30, 2014

इससे पहले की दुनियाँ मुझे रुसवा कर दें

 

passion

इससे पहले की दुनियाँ मुझे रुसवा कर दें

तू मेरे जिस्म से मेरी रूह को फना कर दें

 

मुझको हर सिम्त अंधेरा ही नजर आता है

तू मेरी आँखों मे रोशनी का दरिया भर दें

 

ये जो हालत है मेरे ही बनाए हुये है मगर

मुझको वो इबादत दें जो मुझे जिंदा कर दें

 

                                               

Wednesday, March 12, 2014

फागुन

 

जीजीजीजीजीजीजीजीजीजीजीजीurl

 

फूलो के घेरे मे,तितलियों संग फेरे मे

बागन मे गलियन मे, मदमाती कलियन मे

आमो की बौर मे उलझाया सा मन

ऐसे फिज़ाओं मे फागुन रचा है

 

सरसों के रंग मे महुए की गंध मे

अपनो के संग मे बहती उमंग मे

गुनगुनी धुप मे बौराया सा मन

ऐसे हवाओं मे फागुन सजा है

 

गोरी के अंग मे केसरिया रंग मे

ढ़ोल और मृदंग मे गोपियों के संग मे

सूरत सलोनी के सतरंगी सपनों मे

ऐसे निगाहों मे फागुन बसा है

Monday, June 17, 2013

देखो





अपनी हस्ती उजाड़ कर देखो
गलती ये एक बार कर देखो

प्यार के खेल में मेरे दिलबर    
जीत क्या शय है हार कर देखो                             

हमने एक उम्र काट दी जैसे
तुम एक शब् गुजार कर देखो

लौट आउंगी फिर से पास  तेरे
दिल से मुझको पुकार कर देखो

फिर बुरा नज़र आएगा कोई 
खुद का चेहरा निखार कर देखो
                            (10/2/2010-अनु )




Wednesday, May 15, 2013

रौशनी है चराग जलने तक






फना हो जाएगे सम्हलने तक
कौन जीता है रुत बदलने तक

जश्न कर जिंदगी के हमराही
साथ है रास्ता बदलने तक

पढ़ भी लो उम्र के हसीं सफहे 
रौशनी है चराग जलने तक

अश्क आँखों में रोक कर रखना
लाजमी है ये रात ढलने तक

धुंध से  भरा है सारा आलम
वो भी है सिर्फ आंख मलने तक
                      (16/2/2010-अनु)





Saturday, April 27, 2013

आया






कभी कभी ऐसा भी होता है कि अपना दुःख हर एक के दुःख से ज्यादा महसूस होता है कि बस ख़ामोशी से अपने अंदर उतरते हुए अँधेरे को महसूस करने का मन करता है .......

हमें जिंदगी जीने का सलीका ना आया
मगर जिंदगी ने हमे हर बार आजमाया

भूल चुके जब हम सब माज़ी के किस्से
दुश्मने जां फिर मेरा दिल दुखाने आया

था साथ उसके इक नया हमसफर
होकर पराया हमसे हमको जलाने आया