Saturday, April 27, 2013
आया
Wednesday, December 5, 2012
( गाँव की बोली)
दूर कही गाँव में
पीपल की छांव में
बच्चे खेल रहे है गोली
याद आती है मासूम ठिठोली
खेतों खलिहानो में
गलियों मैदानों में
दौड रही है फगुओ की टोली
याद आती है गांव की होली
तीजो त्योहारों में
गलियों चौबारो में
भाभी बनाती है रंगोली
याद आये दुल्हनियां की डोली
अमवा की डाली में
बेरी की झाडी में
लुक छिप जाते हमजोली
आज सुधि की पिटारी है खोली
Friday, November 30, 2012
अहिस्ता आहिस्ता
मिले जब मुझको ऐसे गम अहिस्ता आहिस्ता
हुई तब आँख मेरी पुरनम अहिस्ता आहिस्ता
छोड दिया जब साथ मेरा साये ने
नाजाने होगई कहा मै गुम अहिस्ता आहिस्ता
जुबा से तो कुछ भी निकलता नहीं
फिर भी तन्हाई गाती है हरदम अहिस्ता आहिस्ता
लहू दिल का उतर है मेरी आँख मे
युही बेवजह मुस्कुराये जाते है हम अहिस्ता आहिस्ता
आपकी याद है दिल का चैन जाना
पर आपको भुलाये जाते है हमदम अहिस्ता आहिस्ता
दिल में उठते गुबार से मायूस न हो
सहरा को गुलजार बनाये जाते है हम अहिस्ता आहिस्ता
Tuesday, October 12, 2010
हर तरफ छिटकी चांदनी रात हो
कुछ ऐसी अपनी भी मुलाकात हो
तेरे हाथो ने थामा मेरा हाथ हो
गुफ्तगू में कोई अनोखी बात हो
हर तरफ छिटकी चांदनी रात हो
मजा आता है छुप छुप मिलने का तभी
जब ढूढती हमे सारी कायनात हो
हो होठो पर मिलने की गुजारिश
आँखों में अश्कों की बरसात हो
इश्क नही मानता ऐसी बाते यारा
तुम हो मुफलिस या साहिबे अमारात हो
दुःख में भी लगाओ कहकहा यारो
नामुमकिन है की बाजी मात हो
(अनु -12/10/2010)
Tuesday, September 7, 2010
दिल कुछ इस तरह जलाये जाते है
दिल के रिश्ते जो आजमाए जाते है
गम जिंदगी के फिर रुलाये जाते है
शमा के साथ परवाना भी जलता है
साथ क्या यूँ भी निभाए जाते है
टूट कर बिखरे अरमानो की तरह
बेसबब हम अश्क बहाए जाते है
बुझती ही नहीं इश्क की आग यारा
दिल कुछ इस तरह जलाये जाते है
दिल रोता ही रहा तेरी बेवफाई पर
हम उल्फत में जख्म खाए जाते है
संगदिल है वो मगर रोयेगा जरूर
दर्द मेरे उसको भी तडपाये जाते है
