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Wednesday, December 5, 2012

( गाँव की बोली)

A Village scene

दूर कही गाँव में

पीपल की छांव में

बच्चे खेल रहे है गोली

याद आती है मासूम ठिठोली

खेतों खलिहानो में

गलियों मैदानों में

दौड रही है फगुओ की टोली

याद आती है गांव की होली

तीजो त्योहारों में

गलियों चौबारो में

भाभी बनाती है रंगोली

याद आये दुल्हनियां की डोली

अमवा की डाली में

बेरी की झाडी में

लुक छिप जाते हमजोली

आज सुधि की पिटारी है खोली

Friday, November 30, 2012

अहिस्ता आहिस्ता

 

 

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मिले जब मुझको ऐसे गम अहिस्ता आहिस्ता

हुई तब आँख मेरी पुरनम अहिस्ता आहिस्ता

छोड दिया जब साथ मेरा साये ने

नाजाने होगई कहा मै गुम अहिस्ता आहिस्ता

जुबा से तो कुछ भी निकलता नहीं

फिर भी तन्हाई गाती है हरदम अहिस्ता आहिस्ता

लहू दिल का उतर है मेरी आँख मे

युही बेवजह मुस्कुराये जाते है हम अहिस्ता आहिस्ता

आपकी याद है दिल का चैन जाना

पर आपको भुलाये जाते है हमदम अहिस्ता आहिस्ता

दिल में उठते गुबार से मायूस न हो

सहरा को गुलजार बनाये जाते है हम अहिस्ता आहिस्ता

Sunday, June 10, 2012

शामे मेरी भी अब बेसदा हो गई



जिंदगी मेरी  अब सजा  हो गई
मौत भी  मुझसे बेवफा  हो गई

मोहब्बत का पैगाम न आया कोई
जाने हमसे  क्या खता  हो गई

रंजो गम फैला है इन हवाओं में
क्यूँ हमसे खफा ये सबा हो गई

खामोश बैठे है महफ़िल में इस तरह 
शामे मेरी भी अब बेसदा हो गई  

भटकते कदमों की आरही है सदा
उनकी आवारगी की इन्तिहाँ हो गई
                           (अनु -20/5/2012)

Thursday, September 15, 2011

क्या मजा मिलता है तुझको मिट जाने में


कल दिया था दिल हमे किसी दीवाने ने
बेहोश बेदिल फिरते रहे हम अनजाने में

हाले दिल सुनाने से रहगया मेरा दिलदार
बाद मुद्दत के वो आया इस गरीबखाने में

नींद की कश्ती हमे सकूंने सहर तक ले गई
डूब गए होते रात हम गम के मयखाने में

नजर मिला कर जो नजर से देदिया साकी
कुर्बान लाखो जाम तेरे इस एक पैमाने पे

शमा हर रात पूछती है बैखोफ परवाने से
क्या मजा मिलता है तुझको मिट जाने में

क्या शिकवा किसी से है अपना अपना नसीब
कोई है मयखाने के बाहर है कोई मयखाने में

तेरी महफिल मेरी गजलों का जिक्र क्यों हो
हमको तो शायर भी बनाया है तेरे अफसाने ने
                                     (अनु -)

Tuesday, June 28, 2011

डूबती कश्ती ने साहिल का इशारा नहीं देखा.




उनके होठो पे तबसुम कोई प्यारा नही देखा
फिर निगाहों ने कोई ख्वाब दोबारा नही देखा

बारहा  महके है गुज़रे हुए मौसम का खयाल  
कफस में फिर कभी गुलज़ार नज़ारा नहीं देखा

शब को रोशन करें ये चाँद  सितारे सारे
करे जो रूह को रोशन वो सितारा नही देखा

तिश्नगी रूह  की मेरी जो बुझाये कोई
अब तलक अब्र कोई ऐसा आवारा नही देखा

यूँ तो जज़्बा भी, हौसला भी  तमन्ना भी थी
डूबती कश्ती ने साहिल का इशारा नहीं देखा. 

Monday, May 9, 2011

वक्त रहता कभी एक सा नहीं है




वक्त रहता कभी एक सा नहीं है
यहाँ मोहोबत करना आसां नहीं है

उनकी यादो का साया है साथ मेरे
क्या हुआ जो सर पर आसमां नहीं है

पीकर अक्सर बेअसुल हो जातेहो तुम
पर जानती हूँ मै,दिल तेरा शैतां नहीं है

खुदा की बख्स है चल रही है सांसे
वरना जीने का मुझको अरमां नहीं है

मेरी बर्बादियो का तुम गम ना करो
इस दिल में अब कोई तूफान नहीं है

Monday, May 2, 2011

तनहाइयों का सिलसिला ये कैसा है


तनहाइयों का सिलसिला ये कैसा है
गर वो मेरा है तो फासला ये कैसा है

तुम  न आओगे कभी ये मै जानती हूँ
फिर तेरी यादो का काफिला ये कैसा है

कभी नाचती थी खुशियाँ मेरे आंगन में
अब उदासियों का मरहला ये कैसा है 

देख लूँ उसको तो दिल को सुकूं आये
मुझे जान से प्यारा दिलजला ये कैसा है

एहसास हो जायेगा मेरे जज़्बात का तुझे
देख मेरी आँखों में ज़लज़ला ये कैसा है

न इश्क ही जीता और न दिल ही हारा
वफ़ा की राह में मेरा हौसला ये कैसा है

हौसला तुझमे भी नहीं है जुदा होने का
दूर हो कर भी भला मामला ये कैसा है