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Thursday, December 15, 2016
जिंदगी
जिंदगी मेरी अब सजा हो गई
मौत भी मुझसे बेवफा हो गई
पैगाम अब तक न उनका आया कोई
जाने हमसे क्या खता हो गई
रंजो गम फैला है इन हवाओं में
क्यूँ हमसे खफा ये सबा हो गई
खामोश बैठे है महफ़िल में इस तरह
शामे मेरी भी अब बेसदा हो गई
भटकते कदमों की आरही है सदा
उनकी आवारगी की इन्तिहाँ हो गई
Thursday, November 6, 2014
वफा जिसने भी अपनाई है
वफा
जिसने
भी
अपनाई
है
यही चोट
उस ने
भी खाई
है
मेरे
जख्म
खुलने
लगे
है
अब
चमन
में
ये
कैसी
बहार
आई
है
खुशी
के
एहसास
हवा
होगये
गमो
से
मेरी
यूँ
शानासाई
है
तमाशे
अब
और
क्या
देखने
है
क्या
मेरी
नजर
ही
तमाशाई
है
आज
धड़कता
है
दिल
तेजी
से
फिर बेवजह
याद
तेरी
आई
है
Monday, June 17, 2013
देखो
अपनी हस्ती उजाड़ कर देखो
गलती
ये
एक
बार
कर
देखो
प्यार
के
खेल
में
मेरे
दिलबर
जीत
क्या
शय
है
हार
कर
देखो
हमने
एक
उम्र
काट
दी
जैसे
तुम
एक
शब्
गुजार
कर
देखो
लौट
आउंगी
फिर
से
पास
तेरे
दिल
से
मुझको
पुकार
कर
देखो
फिर
बुरा
नज़र
न
आएगा
कोई
खुद
का
चेहरा
निखार
कर
देखो
(10/2/2010-
अनु
)
Monday, April 29, 2013
इश्क
मै
जानती
हूँ
लोगो
की
हकिकत
सभी
ये
जुबा
है
की
कुछ
भी
कहती
ही
नहीं
दर्द
है
दिल
में
और
दिल
तडपता
भी
है
पर
ये
आंख
है
क्यों
बरसती
ही
नहीं
दिल
चाहता
है
सीने
से
लगलू
तुझको
पर
करू
क्या
मुझे
तुझपे
यकीं
ही
नहीं
इश्क
है
और
इश्क
पे
जाँ
भी
निसार
कमबख्त
जाँ
है
की
निकलती
ही
नहीं
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