Sunday, March 30, 2014

इससे पहले की दुनियाँ मुझे रुसवा कर दें

 

passion

इससे पहले की दुनियाँ मुझे रुसवा कर दें

तू मेरे जिस्म से मेरी रूह को फना कर दें

 

मुझको हर सिम्त अंधेरा ही नजर आता है

तू मेरी आँखों मे रोशनी का दरिया भर दें

 

ये जो हालत है मेरे ही बनाए हुये है मगर

मुझको वो इबादत दें जो मुझे जिंदा कर दें

 

                                               

Wednesday, March 12, 2014

फागुन

 

जीजीजीजीजीजीजीजीजीजीजीजीurl

 

फूलो के घेरे मे,तितलियों संग फेरे मे

बागन मे गलियन मे, मदमाती कलियन मे

आमो की बौर मे उलझाया सा मन

ऐसे फिज़ाओं मे फागुन रचा है

 

सरसों के रंग मे महुए की गंध मे

अपनो के संग मे बहती उमंग मे

गुनगुनी धुप मे बौराया सा मन

ऐसे हवाओं मे फागुन सजा है

 

गोरी के अंग मे केसरिया रंग मे

ढ़ोल और मृदंग मे गोपियों के संग मे

सूरत सलोनी के सतरंगी सपनों मे

ऐसे निगाहों मे फागुन बसा है

Thursday, December 19, 2013

मै



वक्त बड़ा जालिम है!इन्सान की जिन्दगी में कभी ऐसा वक्त भी आता है जब एक ही ठोकर में उसके सारे सुनहरे खाव्ब बिखर जाते है और वक्त ऐसा जख्म छोड़ जाता है जिसका कोई भी इलाज नहीं कर सकता,फिरहम सोचते है की काश हम कोई बेजान मूरत होते,जज्बात और एहसास से दूर होते,हमारी कोई ख्वाहिस होती और हीकोई आरजू................................




तपता  सहरा हूँ  जल रही हूँ मै
खुश्क  पत्तों में   ढल रही हूँ मै

खामोश हो तुम इक मुद्दत से
शब्-- तनहाइयाँ सह रही हूँ मै

मेरी आँखों में है कोई जलजला
अश्कों में दिन रात बह रही हूँ मै 

दिल पे  है इश्के  शिकश्ताँ  भारी
और तेरी याद में जल रही हूँ मै