Thursday, December 19, 2013

मै



वक्त बड़ा जालिम है!इन्सान की जिन्दगी में कभी ऐसा वक्त भी आता है जब एक ही ठोकर में उसके सारे सुनहरे खाव्ब बिखर जाते है और वक्त ऐसा जख्म छोड़ जाता है जिसका कोई भी इलाज नहीं कर सकता,फिरहम सोचते है की काश हम कोई बेजान मूरत होते,जज्बात और एहसास से दूर होते,हमारी कोई ख्वाहिस होती और हीकोई आरजू................................




तपता  सहरा हूँ  जल रही हूँ मै
खुश्क  पत्तों में   ढल रही हूँ मै

खामोश हो तुम इक मुद्दत से
शब्-- तनहाइयाँ सह रही हूँ मै

मेरी आँखों में है कोई जलजला
अश्कों में दिन रात बह रही हूँ मै 

दिल पे  है इश्के  शिकश्ताँ  भारी
और तेरी याद में जल रही हूँ मै
 

Monday, June 17, 2013

देखो





अपनी हस्ती उजाड़ कर देखो
गलती ये एक बार कर देखो

प्यार के खेल में मेरे दिलबर    
जीत क्या शय है हार कर देखो                             

हमने एक उम्र काट दी जैसे
तुम एक शब् गुजार कर देखो

लौट आउंगी फिर से पास  तेरे
दिल से मुझको पुकार कर देखो

फिर बुरा नज़र आएगा कोई 
खुद का चेहरा निखार कर देखो
                            (10/2/2010-अनु )