Wednesday, February 24, 2010

तनहाइयों का सिलसिला ये कैसा है

तनहाइयों का सिलसिला ये कैसा है
गर वो मेरा है तो फासला ये कैसा है

तुम  न आओगे कभी ये मै जानती हूँ
फिर तेरी यादो का काफिला ये कैसा है

कभी नाचती थी खुशियाँ मेरे आंगन में
अब उदासियों का मरहला ये कैसा है 

देख लूँ उसको तो दिल को सुकूं आये
मुझे जान से प्यारा दिलजला ये कैसा है

एहसास हो जायेगा मेरे जज़्बात का तुझे
देख मेरी आँखों में ज़लज़ला ये कैसा है

न इश्क ही जीता और न दिल ही हारा
वफ़ा की राह में मेरा हौसला ये कैसा है

हौसला तुझमे भी नहीं है जुदा होने का
दूर हो कर भी भला मामला ये कैसा है
(ये मेरी पहली गज़ल है .... अगर पसंद आये तो हौसला दें) (1/2/2010---अनु )

7 comments:

  1. nice gajal Anita ji, carry on it.

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  2. bahot khub .................. sabhi likhte hai , isiliye maine bhi yun hee nahi likh diya hai . anita ji aap sach me bahot achchha likhte hai .
    aapki likhi kai post ko main copy karke rakhti hun . aise hee likhte rahe .

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  3. वहा बहुत खूब बेहतरीन

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में

    तुम मुझ पर ऐतबार करो ।

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