Thursday, September 15, 2011

क्या मजा मिलता है तुझको मिट जाने में


कल दिया था दिल हमे किसी दीवाने ने
बेहोश बेदिल फिरते रहे हम अनजाने में

हाले दिल सुनाने से रहगया मेरा दिलदार
बाद मुद्दत के वो आया इस गरीबखाने में

नींद की कश्ती हमे सकूंने सहर तक ले गई
डूब गए होते रात हम गम के मयखाने में

नजर मिला कर जो नजर से देदिया साकी
कुर्बान लाखो जाम तेरे इस एक पैमाने पे

शमा हर रात पूछती है बैखोफ परवाने से
क्या मजा मिलता है तुझको मिट जाने में

क्या शिकवा किसी से है अपना अपना नसीब
कोई है मयखाने के बाहर है कोई मयखाने में

तेरी महफिल मेरी गजलों का जिक्र क्यों हो
हमको तो शायर भी बनाया है तेरे अफसाने ने
                                     (अनु -)

Tuesday, June 28, 2011

डूबती कश्ती ने साहिल का इशारा नहीं देखा.




उनके होठो पे तबसुम कोई प्यारा नही देखा
फिर निगाहों ने कोई ख्वाब दोबारा नही देखा

बारहा  महके है गुज़रे हुए मौसम का खयाल  
कफस में फिर कभी गुलज़ार नज़ारा नहीं देखा

शब को रोशन करें ये चाँद  सितारे सारे
करे जो रूह को रोशन वो सितारा नही देखा

तिश्नगी रूह  की मेरी जो बुझाये कोई
अब तलक अब्र कोई ऐसा आवारा नही देखा

यूँ तो जज़्बा भी, हौसला भी  तमन्ना भी थी
डूबती कश्ती ने साहिल का इशारा नहीं देखा. 

Sunday, June 12, 2011



हिज्र की रात ये ढलती नहीं  क्यूँ
खिजां की रुत भी बदलती नहीं  क्यूँ

सहर, कहते हैं अगले मोड़ पर है
मगर ये रात फिर चलती नहीं क्यूँ

ख्वाब टूटे पलक में किरकते हैं
आंख शब भर मेरी लगती नहीं क्यूँ  

अभी देखो तो मिटटी में नमी है
कली दिल की मगर खिलती नहीं क्यूँ  
 
मीन हूँ और दरिया है लबालब
प्यास मेरी भला  बुझती नहीं क्यूँ    

Monday, May 9, 2011

वक्त रहता कभी एक सा नहीं है




वक्त रहता कभी एक सा नहीं है
यहाँ मोहोबत करना आसां नहीं है

उनकी यादो का साया है साथ मेरे
क्या हुआ जो सर पर आसमां नहीं है

पीकर अक्सर बेअसुल हो जातेहो तुम
पर जानती हूँ मै,दिल तेरा शैतां नहीं है

खुदा की बख्स है चल रही है सांसे
वरना जीने का मुझको अरमां नहीं है

मेरी बर्बादियो का तुम गम ना करो
इस दिल में अब कोई तूफान नहीं है

Monday, May 2, 2011

तनहाइयों का सिलसिला ये कैसा है


तनहाइयों का सिलसिला ये कैसा है
गर वो मेरा है तो फासला ये कैसा है

तुम  न आओगे कभी ये मै जानती हूँ
फिर तेरी यादो का काफिला ये कैसा है

कभी नाचती थी खुशियाँ मेरे आंगन में
अब उदासियों का मरहला ये कैसा है 

देख लूँ उसको तो दिल को सुकूं आये
मुझे जान से प्यारा दिलजला ये कैसा है

एहसास हो जायेगा मेरे जज़्बात का तुझे
देख मेरी आँखों में ज़लज़ला ये कैसा है

न इश्क ही जीता और न दिल ही हारा
वफ़ा की राह में मेरा हौसला ये कैसा है

हौसला तुझमे भी नहीं है जुदा होने का
दूर हो कर भी भला मामला ये कैसा है