Monday, June 17, 2013

देखो





अपनी हस्ती उजाड़ कर देखो
गलती ये एक बार कर देखो

प्यार के खेल में मेरे दिलबर    
जीत क्या शय है हार कर देखो                             

हमने एक उम्र काट दी जैसे
तुम एक शब् गुजार कर देखो

लौट आउंगी फिर से पास  तेरे
दिल से मुझको पुकार कर देखो

फिर बुरा नज़र आएगा कोई 
खुद का चेहरा निखार कर देखो
                            (10/2/2010-अनु )




Wednesday, May 15, 2013

रौशनी है चराग जलने तक






फना हो जाएगे सम्हलने तक
कौन जीता है रुत बदलने तक

जश्न कर जिंदगी के हमराही
साथ है रास्ता बदलने तक

पढ़ भी लो उम्र के हसीं सफहे 
रौशनी है चराग जलने तक

अश्क आँखों में रोक कर रखना
लाजमी है ये रात ढलने तक

धुंध से  भरा है सारा आलम
वो भी है सिर्फ आंख मलने तक
                      (16/2/2010-अनु)





Monday, April 29, 2013

इश्क




मै जानती हूँ लोगो की हकिकत सभी
ये जुबा है की कुछ भी कहती ही नहीं
 
दर्द है दिल में और दिल तडपता भी है
पर ये आंख है क्यों बरसती ही नहीं

दिल चाहता है सीने से लगलू तुझको 
पर करू क्या मुझे तुझपे यकीं ही नहीं
 
इश्क है और इश्क पे जाँ भी निसार
कमबख्त जाँ है की निकलती ही नहीं

Saturday, April 27, 2013

आया






कभी कभी ऐसा भी होता है कि अपना दुःख हर एक के दुःख से ज्यादा महसूस होता है कि बस ख़ामोशी से अपने अंदर उतरते हुए अँधेरे को महसूस करने का मन करता है .......

हमें जिंदगी जीने का सलीका ना आया
मगर जिंदगी ने हमे हर बार आजमाया

भूल चुके जब हम सब माज़ी के किस्से
दुश्मने जां फिर मेरा दिल दुखाने आया

था साथ उसके इक नया हमसफर
होकर पराया हमसे हमको जलाने आया