दर्द है दिल में और दिल परेशान है
बस यही दर्द अब मेरी पहचान है
हम तेरी आरजू में फना होगये
मेरी चाहत से बस तू ही अनजान है
अपना जीना फकत एक एहसास है
जिस्म में जिंदगी जैसे मेहमान है
हँसती रहती हूँ दिल को भी बहलाती हूँ
पर लबो की हँसी भी तो बेजान है
तुझ को चाहा मेरी बस यही है खता
क्या करूं क्या करूं इश्क नादान है
मिल गई दिल लगाने कि हमको सजा
फिर इस बात से दिल क्यों हैरान है
हर सु फैली हुई है ये कैसी घुटन
बस इक ताजी हवा का ही अरमान है
हर पल बिकता यहाँ ईमान है
कैसी दुनिया है ये कैसा इंसान है

