Saturday, December 18, 2010

दर्द है दिल में और दिल परेशान है



दर्द है दिल में और दिल परेशान है
बस यही दर्द अब मेरी पहचान है

हम तेरी  आरजू में  फना होगये
मेरी चाहत से बस तू ही अनजान है

अपना जीना फकत एक एहसास है
जिस्म में  जिंदगी जैसे मेहमान है

हँसती रहती हूँ दिल को भी बहलाती हूँ
पर लबो की  हँसी भी तो  बेजान है

तुझ को चाहा मेरी बस यही है खता
क्या करूं क्या करूं  इश्क नादान है

मिल गई दिल लगाने कि हमको सजा
फिर इस बात से दिल क्यों हैरान है

हर सु फैली हुई है ये कैसी घुटन
बस इक ताजी हवा का ही अरमान है 

हर पल बिकता यहाँ ईमान है
कैसी दुनिया है ये कैसा इंसान है  
                             

Wednesday, December 1, 2010

इश्क का महल हो गया है खंडहर देखना

 
 
 
बेरंग सी इन दीवारों को बेवजह देखना



इश्क का महल हो गया है खंडहर देखना




रिश्ता तोडा भी नहीं उसने निभाया भी नहीं


है बावफा के हाथ में भी इक खंजर देखना




मेरे जख्मो को कोई मरहम मिले न मिले


मिले मेरी लाश को इक जमीं बंजर देखना




इतनी तन्हा हूँ कि घबराती है तन्हाई भी


है तन्हाई को हमसे बिछड़ने का डर देखना




ऐ मेरे हम नफ्स तुम गर थोड़ा साथ दो


पल दो पल ही है गम की ये सहर देखना

Tuesday, November 9, 2010

सैलाब अश्को के उमड़ आया तो बुरा मान गए




हाले दिल उनको सुनाया तो बुरा मान गए

जख्मे दिल अपना दिखाया तो बुरा मान गए



हमने बांधे हुए थे अपने जज्बात के तूफान

सैलाब अश्को के उमड़ आया तो बुरा मान गए



जो मोहोब्बत में कभी दी थी निशानी मुझको

उसको दुनिया को दिखाया तो बुरा मान गए



बेवफाई का गिला हमसे था अक्सर तुमको

यही सवाल हमने दोहराया तो बुरा मान गए



मुहब्बत में जो साथ गुजारा था कभी 'अनु'

लम्हा वो याद दिलाया तो बुरा मान गए









Tuesday, October 12, 2010

हर तरफ छिटकी चांदनी रात हो

moon


कुछ ऐसी अपनी भी मुलाकात हो
तेरे हाथो ने थामा मेरा हाथ हो
गुफ्तगू में कोई अनोखी बात हो
हर तरफ छिटकी चांदनी रात हो
मजा आता है छुप छुप मिलने का तभी
जब ढूढती हमे सारी कायनात हो
हो होठो पर मिलने की गुजारिश
आँखों में अश्कों की बरसात हो
इश्क नही मानता ऐसी बाते यारा
तुम हो मुफलिस या साहिबे अमारात हो
दुःख में भी लगाओ कहकहा यारो
नामुमकिन है की बाजी मात हो
(अनु -12/10/2010)


Thursday, October 7, 2010

बेसबब हम अश्क बहाए जाते है


दिल के रिश्ते जो आजमाए जाते है     
गम जिंदगी के फिर रुलाये जाते है  

शमा के साथ परवाना भी जलता है
साथ क्या  यूँ  निभाए जाते है

टूट कर बिखरे अरमानो की तरह
बेसबब हम अश्क बहाए जाते है

बुझती ही नहीं इश्क की आग यारा
दिल कुछ इस तरह जलाये जाते है

दिल रोता ही रहा तेरी बेवफाई पर
हम उल्फत में जख्म खाए जाते है

संगदिल है वो मगर रोयेगा जरूर
दर्द मेरे उसको भी तडपाये जाते है

Sunday, September 12, 2010

उन चरागों से क्यों उठता है धुआँ


मेरे जख्मो के जो मिल जाते निशां
तन्हा होती मै न जिंदगी होती वीरां

तेज आंधियों ने जो बुझाये है दिए
उन चरागों से क्यों उठता है धुआँ

तुम गर तोड़ दोगे यूँ आईने मेरे
इन टूटी तस्वीरों को मै देदुंगी जुबाँ

कल रात तेरी याद में रोते ही रहे
संग रोने लगी ये सावन की घटा

ऐसी राहों से भी हम गुजरे है जहा
गमों की धूप थी सर पे था खुला आसमां

आपने ही एहसासों के हाथो हुई जख्मी
मुझको तुमसे तो ना था कोई शिकवा

इन सूनी उदास रातो के दर्द से
कौन जाने हम कब होजाये फ़ना

ना उमीदी को करो न खुद पे सवार
अभी खुशबु ए जिंदगी है और है नया समां







Tuesday, September 7, 2010

दिल कुछ इस तरह जलाये जाते है


दिल के रिश्ते जो आजमाए जाते है
गम जिंदगी के फिर रुलाये जाते है

शमा के साथ परवाना भी जलता है
साथ  क्या  यूँ भी  निभाए  जाते है

टूट कर  बिखरे  अरमानो की तरह
बेसबब  हम  अश्क  बहाए जाते है

बुझती ही नहीं इश्क की आग यारा
दिल कुछ इस तरह जलाये जाते है

दिल रोता ही रहा तेरी बेवफाई पर
हम उल्फत में जख्म खाए जाते है

संगदिल है वो मगर रोयेगा जरूर
दर्द मेरे उसको भी तडपाये जाते है