Monday, April 5, 2010

वो भी जलता है तडपती है प्यास मेरी तरह


फिजां भी लगती है तन्हा उदास मेरी तरह
क्या इसे भी है किसी की तलाश मेरी तरह


चाँद सहरा की वादियों में भटका शब् भर 
वो भी जलता है तडपती है प्यास मेरी तरह

खुद को रखा है सब्ज आंसुओ की बारिश से 
यूँ तो आता है हिज्र किसे रास मेरी तरह

रोज आती है सरे शाम हिचकियाँ किस को 
याद आता है किसे कोई खास मेरी तर

फुरकत-ए-इश्क ने दुनिया उजाड़ दी जिसकी 
आज भी टूटी नहीं उसकी आस मेरी तरह

ज़िक्रे मज्लूम न पहुंची दरे इंसाफी तक 
हिम्मते कशमकश रही न काश मेरी तरह





Thursday, April 1, 2010

बाजी तो दिल की तुम भी हारे

हर रोज नए ख्वाब के इशारे
ये मुहब्बत के है झूठे सहारे

हम न जीते तो क्या हुआ
बाजी तो दिल की तुम भी हारे

शब का रास्ता पूछने वाले
नजाने कैसे अपना दिन गुजारे

झूठ है वो जो हम समझते है
कर्ज वफा के है तुमने उतारे

( 14/2/2010-अनु)

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Wednesday, March 31, 2010

सुहानी स्याह रातो में मोहोब्बत नूर बनती है

सुहानी स्याह रातो में मोहोब्बत नूर बनती है
हमारे दिल के आईने में तब दुनिया संवरती है

वफा के फूल मेरी जिंदगी में मुस्कुराए थे
उन्हीं की याद में अब तक मेरी हस्ती महकती है

कभी तो बादलों की छाँव में हसरत मचलती है
कभी तनहाइयों की आग में ख्वाहिश पिघलती है

खिज़ा की रात में तारों की झालर झिलमिलाती है
किसी की याद बन कर चांदनी छत पर सिसकती है

कभी लगता है दिल फट के निकल जाएगा पहलू से
जो अफसाना मोहोब्बत का गमे तन्हाई ’लिखती है
(26/2/2010-अनु)

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Sunday, March 28, 2010

इश्क दरिया है लोगो को डुबाता ही रहा


बहुत दरिया दिल था वो शख्स

छीन कर आँख वो चराग दिखता ही रहा

दर्दे दिल आँख से बह कर निकले
हाल पे मेरे वो चुपचाप मुस्कुराता ही रहा

दिखाया जब भी उसको जख्मे जिगर
नोक से काँटों की मरहम वो लगता ही रहा

बह गई मै भी तेरी चाहत में 'अनु'
इश्क दरिया है लोगो को डुबाता ही रहा
(14/2/2010-अनु )

Thursday, March 25, 2010

Untitled


दिल से मेरे लिपटा वो किसी राज की सूरत
वो शख्स जिसे मेरा कभी होना नहीं है

इश्को मोहोब्बतों के है किस्से बड़े अजीब
पाना भी नहीं है उसे खोना भी नहीं है

समझेगा मुझे पागल हर देखने वाला
चहरे से कुछ बयान तो होना ही नहीं है

हम उनको बुलाने का तकाजा नहीं करते
इंकार मगर उनसे होना भी नहीं है
(11/2/2010-अनु)


Monday, March 22, 2010

जीत क्या शय है हार कर देखो

अपनी हस्ती उजाड कर देखो

गलती ये एक बार कर देखो

 

प्यार के खेल में मेरे दिलबर    

जीत क्या शय है हार कर देखो                              

 

हमने एक उम्र काट दी जैसे

तुम एक शब् गुजार कर देखो

 

लौट आउंगी फिर से पास  तेरे

दिल से मुझको पुकार कर देखो

 

फिर बुरा नज़र न आएगा कोई  

खुद का चेहरा निखार कर देखो

                            (10/2/2010-अनु )

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Saturday, March 20, 2010

मन अब भी खोया रहता है


ये बात सपन सी लगती है
जब हम भी खुश खुश रहते थे
थे पास हमारे तब भी वो
जब ख्वाब सुनहरे सजते थे
मन खोया खोया रहता था
अरमा बेख़ौफ़ मचलते थे
है पास हमारे अब भी वो
पर तन्हा तन्हा रहते है
मन अब भी खोया रहता है
पर अरमाँ नहीं मचलते है
हम किसको ढूंढा करते है
और क्या हम ढूंढा करते है
दुनिया भर के इस मेले में
क्यों तन्हा घूमा करते है
है पास हमारे अब भी वो
(3/2/2010----अनु )